शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
पावका नः सरस्वती (सरस्वती सूक्त)
पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती। यज्ञं वष्टु धियावसुः॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक मन्त्र
स्वरूपपावका (पवित्र करने वाली), धियावसु (बुद्धि की देवी)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
पवित्र करने वाली, अन्न तथा बल से युक्त और बुद्धि रूपी धन वाली माँ सरस्वती हमारे इस यज्ञ (ज्ञान-साधना) को स्वीकार करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मन और विचारों की शुद्धि, लौकिक शिक्षा के साथ पारलौकिक ज्ञान की प्राप्ति और ब्रह्मांडीय व्यवस्था (ऋत) से जुड़ाव
विस्तृत लाभ
मन और विचारों की शुद्धि, लौकिक शिक्षा के साथ पारलौकिक ज्ञान की प्राप्ति और ब्रह्मांडीय व्यवस्था (ऋत) से जुड़ाव।
जप काल
प्रातःकाल, यज्ञ या विद्यारंभ संस्कार के समय।
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