ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

महो अर्णः सरस्वती

महो अर्णः सरस्वती प्रचेतयति केतुना। धियो विश्वा विराजति॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मन्त्र / ज्योतिषीय दोष निवारक मन्त्र
स्वरूपप्रज्ञा-स्वरूपा, विद्यादायिनी
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

महान जलराशि (ज्ञान का प्रवाह) रूपी सरस्वती अपने ज्ञान-रूपी ध्वज (केतु) से सबको सचेत करती हैं और हमारी सभी बुद्धियों को प्रकाशित करती हैं।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

प्रज्ञा का विकास, अज्ञान के अंधकार का नाश तथा जन्म-कुंडली में केतु ग्रह के दुष्प्रभावों का शमन

विस्तृत लाभ

प्रज्ञा का विकास, अज्ञान के अंधकार का नाश तथा जन्म-कुंडली में केतु ग्रह के दुष्प्रभावों का शमन।

जप काल

नियमित अध्ययन से पूर्व या केतु शांति अनुष्ठान में।

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