समृद्धि-विद्या मन्त्र
ॐ श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
श्री (समृद्धि) और ह्रीं (शक्ति) से युक्त सरस्वती देवी को मैं नमन करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
ज्ञान के साथ-साथ धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति
यह विद्या और भौतिक सफलता दोनों का समन्वय करता है
विस्तृत लाभ
ज्ञान के साथ-साथ धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति। यह विद्या और भौतिक सफलता दोनों का समन्वय करता है।
जप काल
नित्य पूजा में सन्ध्या काल में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ज्वाला नरसिंहाय नमः
ॐ मायिने नमः
ॐ करुणामृतसागरायै नमः
ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि। तन्नो राधा प्रचोदयात्॥
ॐ हरिवल्लभायै नमः
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥