ज्ञानं देहि स्मृतिं देहि (याज्ञवल्क्य कृत)
ज्ञानं देहि स्मृतिं देहि विद्यां देहि देवते। प्रतिष्ठां कवितां देहि शक्तिं शिष्यप्रबोधिकाम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
हे देवी! मुझे ज्ञान, स्मृति, विद्या, प्रतिष्ठा, कविता की शक्ति और शिष्यों को शिक्षित करने की सामर्थ्य प्रदान करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
शिक्षकों और गुरुओं के लिए शिष्यों को पढ़ाने की शक्ति (प्रबोधिका शक्ति) और कवित्व की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
शिक्षकों और गुरुओं के लिए शिष्यों को पढ़ाने की शक्ति (प्रबोधिका शक्ति) और कवित्व की प्राप्ति।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ब्राह्म्यै नमः
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि प्रसन्नवक्त्रपङ्कजे निकुञ्जभूविलासिनि। व्रजेन्द्रभानुनन्दिनि व्रजेन्द्रसूनुसङ्गते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥ मुनीन्द्र-वन्दिते (ऋषियों द्वारा वंदित)
श्री राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥
ॐ स्वप्रकाशस्वरूपिण्यै नमः
ॐ कबन्धराशिमध्यगायै नमः
हौं (Haum)