मुख कमल वासिनी मन्त्र
ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम् कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
मुख रूपी कमल पर निवास करने वाली, पापों का नाश करने वाली, हे वाग्वादिनी सरस्वती! आप मेरे मुख से बोलें (सत्य और ज्ञान बुलवाएं), आपको नमस्कार और आहुति है।
इस मंत्र से क्या होगा?
वाणी में वशीकरण शक्ति का उदय, पूर्वकृत पाप कर्मों का क्षय, धन और परम ज्ञान की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
वाणी में वशीकरण शक्ति का उदय, पूर्वकृत पाप कर्मों का क्षय, धन और परम ज्ञान की प्राप्ति।
जप काल
1 लाख बार जपने से वाक् सिद्धि होती है। जैन आगम परंपरा में भी यह मन्त्र मान्य है।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ब्रह्मविदे नमः
ॐ कृष्णाव्यसनकर्शकाय नमः
जो अदम्य साहस वाले परम वीर हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: साहस और निर्भयता) 19।
अहं रुद्राय धनुरातनोमि ब्रह्मद्विषे शरवे हन्तवा उ। अहं जनाय समदं कृणोम्यहं द्यावापृथिवी आ विवेश॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये प्रणवार्धमात्रा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ विश्वम्भराय नमः