शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
ऋण-मुक्ति एवं संकटमोचन मंत्र
ॐ महाबलाय वीराय चिरंजीविने उद्दते। हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारऋण-मुक्ति / बाधा-नाशक मंत्र
स्वरूपमहावीर / चिरंजीवी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
महान बलशाली, वीर, युगों-युगों तक जीवित रहने वाले (चिरंजीवी), वज्र के समान कठोर देह वाले और विशाल महासागर को एक छलांग में लांघने वाले भगवान को मेरा नमन है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भारी ऋण (Debts) से मुक्ति, दरिद्रता का नाश और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा व अदम्य साहस का संचार
विस्तृत लाभ
भारी ऋण (Debts) से मुक्ति, दरिद्रता का नाश और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा व अदम्य साहस का संचार 27।
जप काल
मंगलवार के दिन पूर्ण श्रद्धा के साथ लाल पुष्प अर्पित करते हुए।
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