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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

सरस्वती प्रार्थना घनपाठ

देवीं सरस्वतीं सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिः॥ सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं॥ वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिर्वाजेभिर्वाजिनीवतीं। वाजिनीवतीति वाजिनी-वती॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक घनपाठ मन्त्र
स्वरूपवाजिनीवती (अन्न और शक्ति प्रदात्री)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

यह सरस्वती सूक्त के शब्दों का ज्यामितीय (mathematical) पुनरावृत्ति पाठ है, जो वाणी की देवी से प्रज्ञा और शक्ति का सघन आह्वान करता है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

स्मरण शक्ति (Memory) और मस्तिष्क की एकाग्रता में अत्यधिक वृद्धि

02

घनपाठ के विशेष श्रवण और पठन से मस्तिष्क की न्यूरल तरंगें संतुलित होती हैं

विस्तृत लाभ

स्मरण शक्ति (Memory) और मस्तिष्क की एकाग्रता में अत्यधिक वृद्धि। घनपाठ के विशेष श्रवण और पठन से मस्तिष्क की न्यूरल तरंगें संतुलित होती हैं।

जप काल

गुरुकुल परंपरा में विशेष नाद-साधना के समय उच्च स्वर में।

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