शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
त्वं देवि सरस्वत्यवा
त्वं देवि सरस्वत्यवा वाजेषु वाजिनि। रदा पूषेव नः सनिम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक मन्त्र
स्वरूपवाजिनी (शक्तिशालिनी, प्रचुरता देने वाली)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे दिव्य सरस्वती! अन्न एवं शक्ति से संपन्न तुम संग्रामों (बौद्धिक या भौतिक) में हमारी रक्षा करो और पूषा देवता के समान हमें धन-संपत्ति (ज्ञान रूपी) प्रदान करो।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विवादों (शास्त्रार्थ) में विजय और बौद्धिक संघर्षों में सफलता
विस्तृत लाभ
विवादों (शास्त्रार्थ) में विजय और बौद्धिक संघर्षों में सफलता।
जप काल
शास्त्रार्थ, वाद-विवाद प्रतियोगिता या परीक्षा से पूर्व।
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