ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

प्रज्ञावर्धन मन्त्र

ॐ नमो भगवति सरस्वति परमेश्वरि। वाग्वादिनि मम विद्यां देहि भगवति। भंसवाहिनि हंससमारूढे बुद्धिं देहि देहि। प्रज्ञां देहि देहि विद्यां परमेश्वरि सरस्वति स्वाहा॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारप्रज्ञावर्धन / विद्या प्राप्ति मन्त्र
स्वरूपहंसवाहिनी, परमेश्वरी
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हंस पर सवार होने वाली हे परमेश्वरी सरस्वती! मुझे विद्या दें, मुझे कुशाग्र बुद्धि दें, मुझे प्रज्ञा दें, आपको आहुति है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

उच्च मानसिक क्षमता, मेधा और प्रज्ञा की अभूतपूर्व वृद्धि

विस्तृत लाभ

उच्च मानसिक क्षमता, मेधा और प्रज्ञा की अभूतपूर्व वृद्धि।

जप काल

विद्यारम्भ के समय या परीक्षा काल में।

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