प्रज्ञावर्धन मन्त्र
ॐ नमो भगवति सरस्वति परमेश्वरि। वाग्वादिनि मम विद्यां देहि भगवति। भंसवाहिनि हंससमारूढे बुद्धिं देहि देहि। प्रज्ञां देहि देहि विद्यां परमेश्वरि सरस्वति स्वाहा॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हंस पर सवार होने वाली हे परमेश्वरी सरस्वती! मुझे विद्या दें, मुझे कुशाग्र बुद्धि दें, मुझे प्रज्ञा दें, आपको आहुति है।
इस मंत्र से क्या होगा?
उच्च मानसिक क्षमता, मेधा और प्रज्ञा की अभूतपूर्व वृद्धि
विस्तृत लाभ
उच्च मानसिक क्षमता, मेधा और प्रज्ञा की अभूतपूर्व वृद्धि।
जप काल
विद्यारम्भ के समय या परीक्षा काल में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्धारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं अजामिलबद्धाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षणभैरवाय मम दारिद्र्य विद्वेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं।
ॐ ललाटाक्षाय नमः
ॐ जितवारशये नमः
ॐ सदाकृष्णकुतूहल्यै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं जय लक्ष्मी प्रियाय नित्य प्रमुदित चेतसे लक्ष्मी स्रितार्थ देहाय श्रीं ह्रीं नमः
ॐ कर्पूरामृतपायिन्यै नमः