शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
पश्चिम रक्षा
कविजिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहा मां वारुणेऽवतु। (अर्थ: कवियों की जिह्वा में बसने वाली देवी पश्चिम में रक्षा करें) 8
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥ 17
ॐ लम्बोदराय हुं
ॐ इन्दुशीतलायै नमः
ॐ कराल-वदनां घोरां मुक्त-केशीं चतुर्भुजाम्। कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्ड-माला विभूषिताम्। सद्यः-छिन्न-शिरः-खड्ग-वामाधोर्ध्व-कराम्बुजाम्। अभयं वरदञ्चैव दक्षिणोर्ध्वाधः-पाणिकाम्॥
ॐ महोदराय नमः
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥