शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ ब्रह्मणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपवेदमय
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो साक्षात् वेद और ब्रह्म-विद्या के स्वरूप हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वेद ज्ञान
विस्तृत लाभ
वेद ज्ञान
जप काल
स्वाध्याय पूर्व
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
द्विषड्भुजं द्वादशदिव्यनेत्रं त्रयीतनुं शूलमसिं दधानम् । शेषावतारं कमनीयरूपं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
क्लह्रीं (Klhrīm)
ॐ पद्मनाभाय नमः
ॐ अनन्तवीर्याय नमः।
ॐ नमो भगवते महोग्र दिग्बन्धन नरसिंहाय ज्वालामुखाय अग्निनेत्राय... हन हन दह दह पच पच बन्ध बन्ध कील कील स्वाहा
वेताल शक्ति शर कार्मुक चक्र खट्वाङ्ग मुद्गर गदाम् अङ्कुश नागपाशान् । शूलं च कुन्तं परशुं ध्वजमुद्वहन्तं वीरं गणेशमरुणं सततं स्मरामि ॥