ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

परशुराम मंत्र

विष्णु के छठे अवतार

212 मंत्र

ॐ वीराय नमः — अर्थ

जो अदम्य साहस वाले परम वीर हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: साहस और निर्भयता) 19।

नाम-मंत्र

ॐ तत्त्वरूपिणे नमः

भार्गव कवच (वीर-रक्षक)

कथं जयेयुर्वीरेन्द्राः कवचैर्नावृताङ्गकाः। प्रयान्ति भीता रामस्य वर्मणा वीक्ष्य रक्षितम्॥

ॐ विष्णवे नमः — अर्थ

जो सर्वव्यापक भगवान विष्णु के ही साक्षात् अवतार हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: सर्व-कल्याण) 19।

नाम-मंत्र

ॐ राजेन्द्राय नमः

परशुराम अष्टकम् (समापन श्लोक)

इति श्रीप. प. श्रीवासुदेवानन्दसरस्वतीविरचितं श्रीपरशुरामस्तोत्रं संपूर्णम्॥

नाम-मंत्र

ॐ महाविष्णवे नमः

महर्षि-वंदित परशुराम

महेन्द्रे वै गिरिश्रेष्ठे रामं नित्यम् उपासते। ऋषयो वेदविदुषो गन्धर्वाप्सरसस्तथा॥

नाम-मंत्र

ॐ सर्वसिद्धिदाय नमः

भार्गव कवच (ब्रह्मज्ञान प्राप्ति)

कवचस्यास्य जापी तु ब्रह्मज्ञानं च विन्दति। इत्येतदुक्तं कवचं मया हैहयविद्विषः॥

ॐ भृगुनन्दनाय नमः — अर्थ

जो महर्षि भृगु के पवित्र वंश को आनंदित करने वाले हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: कुल-गोत्र की वृद्धि) 19।

नाम-मंत्र

ॐ जितामित्राय नमः

परशुराम अष्टकम् (श्लोक 6)

शुद्धं बुद्धं महाप्रज्ञापण्डितं रणपण्डितं। रामं श्रीदत्तकरुणाभाजनं विप्ररंजनम्॥

ॐ प्रतापवते नमः — अर्थ

जो अत्यंत तेजस्वी और महाप्रतापी हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: व्यक्तित्व में तेज और ओज की वृद्धि) 19।

चिरंजीवी परशुराम स्तुति

आस्तेऽद्यापि महेन्द्राद्रौ न्यस्तदण्डः प्रशान्तधीः। उपगीयमानचरितः सिद्धगन्धर्वचारणैः॥

ॐ पृथिवीपतये नमः — अर्थ

जिन्होंने संपूर्ण पृथ्वी को जीतकर अश्वमेध यज्ञ में महर्षि कश्यप को दान कर दिया, उन पृथ्वी-पति को नमस्कार। (लाभ: संपत्ति एवं राज्याधिकार की प्राप्ति) 19।

भार्गव कवच (जिज्ञासा)

न श्रुतं कवचं देव न चोक्तं भवता मम। इति पृष्टः स गिरिशो मन्त्रयन्त्राङ्गतत्त्ववित्॥

नाम-मंत्र

ॐ जामदग्निजाय नमः

श्री परशुराम ध्यान मंत्र

ध्यायेच्च तामस क्षत्र रुधिर रक्त परश्वधम्। रक्त नेत्रं करस्थं ब्रह्म सूत्रं यम प्रभम्॥

नाम-मंत्र

ॐ वरदाय नमः

भार्गव कवच (इष्ट-निष्ठा)

जामदग्न्यः परं यस्य दैवतं भृत्यवत्सलः। नित्यं परश्वधभृतः कवचस्यास्य धारणात्॥

नाम-मंत्र

ॐ सर्वशक्तिधृषे नमः

परशुराम अष्टकम् (श्लोक 2)

नमामि भार्गवं रामं रेणुकाचित्तनन्दनं। मोचिताम्बार्तिमुत्पातनाशनं क्षत्रनाशनम्॥

नाम-मंत्र

ॐ परात्पराय नमः

भार्गव कवच (फलश्रुति-सौभाग्य)

जपतां कवचं नित्यं सर्वसौभाग्यपूरितम्। इति श्रीविष्णुयामले उपरिभागे जामदग्न्यदिव्याञ्जनसिद्धिकल्पे श्रीभार्गवकवचं सम्पूर्णम्॥

ॐ परशुधारिणे नमः — अर्थ

जो दुष्टों के दमन हेतु भयंकर परशु (फरसा) धारण करते हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: शत्रुओं से रक्षा) 19।

नाम-मंत्र

ॐ ऋषिप्रवरवन्द्याय नमः

परशुराम अष्टकम् (श्लोक 5)

परशुं दक्षिणे हस्ते वामे च दधतं धनुः। रम्यं भृगुकुलोत्तंसं घनश्यामं मनोहरम्॥

ॐ एकवीरात्मजाय नमः — अर्थ

जो माता एकवीरा (रेणुका का एक नाम) के पुत्र हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: माता की असीम कृपा) 19।

भार्गव पराक्रम स्तुति

आत्मनः शक्तिमुद्वीक्ष्य मानोत्साहौ तु यो व्रजेत्। शत्रूनेकोऽपि हन्याच्च क्षत्रियान् भार्गवो यथा॥

ॐ जामदग्न्याय नमः — अर्थ

जो महान तपस्वी महर्षि जमदग्नि के पुत्र हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: पितृ-दोष शांति) 19।

परशुराम अष्टकम् (श्लोक 7)

मार्गणाशोषिताभ्ध्यंशं पावनं चिरजीवनम्। य एतानि जपेन्द्रामनामानि स कृती भवेत्॥

ॐ सह्याद्रिवासिने नमः — अर्थ

जो शांत भाव से सह्याद्रि (और महेंद्र) पर्वत पर निवास करते हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: जीवन में स्थिरता और भूमि-लाभ) 19।

परशुराम द्वि-अक्षरी बीज मंत्र

ॐ रां रां

ॐ क्षत्रजिते नमः — अर्थ

जिन्होंने धर्म-विरोधी आतातायी क्षत्रियों पर विजय प्राप्त की, उन्हें नमस्कार। (लाभ: प्रतिस्पर्धियों पर विजय) 19।

भार्गव कवच (प्रारंभ एवं शिव-पार्वती संवाद)

कैलासशिखरे रम्ये शंकरं लोकशंकरम्। पार्वत्युवाच- त्वत्तः श्रुतान्यशेषाणि जामदग्न्यस्य साम्प्रतम्॥

नाम-मंत्र

ॐ श्रीमते नमः

भार्गव दर्शन स्तुति

उपस्पृश्य महेन्द्राद्रौ रामं दृष्ट्वाभिवाद्य च।

नाम-मंत्र

ॐ भार्गवाय नमः

भार्गव कवच (चतुर्वर्ग प्रदाता)

रहस्यमपि हि ब्रूयुर्लोकैकहितदृष्टयः। शिव उवाच- धर्मार्थकाममोक्षाणामनायासं सुसिद्धिदम्॥

नाम-मंत्र

ॐ शाश्वताय नमः

श्री परशुराम गायत्री मंत्र (प्रथम पाठ)

ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्

नाम-मंत्र

ॐ परब्रह्मणे नमः

भार्गव कवच (श्री आकर्षण)

श्रियमाक्रष्टुकामानामिदं कवचमुत्तमम्। स जामदग्न्यकवचं नित्यमावर्तयेन्नरः॥

नाम-मंत्र

ॐ सदाचाराय नमः

परशुराम अष्टकम् (श्लोक 1)

कराभ्यां परशुं चापं दधानं रेणुकात्मजं। जामदग्न्यं भजे रामं भार्गवं क्षत्रियान्तकं॥

नाम-मंत्र

ॐ कंजलोचनाय नमः

भार्गव कवच (सभा-विजय एवं वाक्-सिद्धि)

सभासु वदतां श्रेष्ठो राज्ञां भवति च प्रियः। वैदिकं तान्त्रिकं चैव मान्त्रिकं ज्ञानमुत्तमम्॥

नाम-मंत्र

ॐ वरेण्याय नमः

पाप-शमन स्तुति

दुष्टं क्षत्रं भुवो भारमब्रह्मण्यमनीनशत्। तस्य नामानि पुण्यानि वच्मि ते पुरुषर्षभ॥

नाम-मंत्र

ॐ परमार्थैकनिरताय नमः

भार्गव कवच (गोपनीयता एवं यश वृद्धि)

गोपनीयमिदं देवि ममात्मासि मणिर्यथा। धन्यं यशस्यमायुष्यं श्रीकरं पुष्टिवर्धनम्॥

नाम-मंत्र

ॐ जनार्दनाय नमः

परशुराम अष्टकम् (श्लोक 3)

भयार्तस्वजनत्राणतत्परं धर्मतत्परम्। गतगर्वप्रियं शूरं जमदग्निसुतुं मतम्॥

ॐ हरये नमः — अर्थ

जो पापों का हरण करने वाले साक्षात् भगवान हरि (विष्णु) स्वरूप हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: पाप-नाश) 19।

परशुराम मूल/बीज मंत्र

ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नमः

श्री परशुराम गायत्री मंत्र (द्वितीय पाठ)

ॐ जामदग्नाय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुरामः प्रचोदयात्

परशुराम शक्ति उद्घोष मंत्र

अग्रतश्चतुरो वेदान् पृष्ठतः सशरं धनुः। उभाभ्यां च समर्थोऽहं शापादपि शरादपि॥

परशुराम अष्टकम् (श्लोक 4)

वशीकृतमहादेवं दृप्तभूपकुलान्तकम्। तेजस्विनं कार्तवीर्यनाशनं भवनाशनम्॥

ॐ रामाय नमः — अर्थ

जो भक्तों के हृदय में रमण करने वाले भगवान राम (भार्गव राम) हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: आंतरिक शांति) 19।