भार्गव पराक्रम स्तुति
आत्मनः शक्तिमुद्वीक्ष्य मानोत्साहौ तु यो व्रजेत्। शत्रूनेकोऽपि हन्याच्च क्षत्रियान् भार्गवो यथा॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो व्यक्ति अपनी शक्ति का सही आकलन करके आत्मसम्मान और उत्साह के साथ आगे बढ़ता है, वह अकेला ही अनेक शत्रुओं का नाश कर सकता है, ठीक वैसे ही जैसे भार्गव (परशुराम) ने किया था।
इस मंत्र से क्या होगा?
असीम आत्मविश्वास और अदम्य साहस की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
असीम आत्मविश्वास और अदम्य साहस की प्राप्ति।
जप काल
युद्ध, प्रतिस्पर्धा या कठिन जीवन-चुनौतियों का सामना करने से पूर्व।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये अन्तश्चेतनात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ वरप्रदायै नमः
ॐ करच्छिन्नायै नमः
ॐ पिङ्गलाक्षाय नमः
ॐ शार्ङ्गिण्यै नमः