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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

परशुराम अष्टकम् (श्लोक 5)

परशुं दक्षिणे हस्ते वामे च दधतं धनुः। रम्यं भृगुकुलोत्तंसं घनश्यामं मनोहरम्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारध्यान/स्तोत्र मंत्र
स्वरूपभृगुकुलोत्तंस, घनश्याम
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो अपने दाहिने हाथ में परशु और बाएँ हाथ में धनुष धारण करते हैं, जो भृगु कुल के श्रेष्ठ आभूषण (उत्तंस) हैं, तथा जिनका वर्ण मेघ के समान घनश्याम और अत्यंत मनोहर है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मन की असीम शांति और परमसौंदर्य का बोध

विस्तृत लाभ

मन की असीम शांति और परमसौंदर्य का बोध।

जप काल

ध्यान-साधना के समय नेत्र बंद करके।

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