शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भार्गव कवच (जिज्ञासा)
न श्रुतं कवचं देव न चोक्तं भवता मम। इति पृष्टः स गिरिशो मन्त्रयन्त्राङ्गतत्त्ववित्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकवच-मंत्र
स्वरूपरहस्यमय शक्ति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
"हे देव! मैंने उनका कोई कवच नहीं सुना और न ही आपने मुझे बताया है।" ऐसा पूछे जाने पर मंत्र और यंत्र के तत्वों को पूर्णतः जानने वाले भगवान शिव ने कहा।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
तंत्र-मंत्र और यन्त्र के अंगों का गूढ़ ज्ञान
विस्तृत लाभ
तंत्र-मंत्र और यन्त्र के अंगों का गूढ़ ज्ञान।
जप काल
नित्य कवच पाठ में।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि। तन्नो राधा प्रचोदयात्॥
ॐ भारत्यीप्रियाय नमः
ॐ शरणागतवत्सलाय नमः
ॐ वागीश्वराय विद्महे हयग्रीवाय धीमहि तन्नो हयग्रीवः प्रचोदयात्।
प्रतीच्यां उन्मत्त भैरवाय नमः प्रतीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ शुभदाय नमः