शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ सर्वरोगहराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपरोग-नाशक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सभी असाध्य रोगों और महामारियों को हरने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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ॐ गुणवत्यै नमः
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्। तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥
वेताल शक्ति शर कार्मुक चक्र खट्वाङ्ग मुद्गर गदाम् अङ्कुश नागपाशान् । शूलं च कुन्तं परशुं ध्वजमुद्वहन्तं वीरं गणेशमरुणं सततं स्मरामि ॥
ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदायै नमः
दुष्टं क्षत्रं भुवो भारमब्रह्मण्यमनीनशत्। तस्य नामानि पुण्यानि वच्मि ते पुरुषर्षभ॥
ॐ भीमाय नमः