भार्गव दर्शन स्तुति
उपस्पृश्य महेन्द्राद्रौ रामं दृष्ट्वाभिवाद्य च।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
(भगवान बलराम ने) महेंद्र पर्वत पर स्नान/आचमन करके भगवान परशुराम के दर्शन किए और उन्हें अभिवादन (प्रणाम) किया।
इस मंत्र से क्या होगा?
तीर्थ यात्रा का पूर्ण फल एवं सद्गुरु का सान्निध्य
विस्तृत लाभ
तीर्थ यात्रा का पूर्ण फल एवं सद्गुरु का सान्निध्य।
जप काल
महेंद्रगिरि या किसी पवित्र तीर्थ के दर्शन के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः। आयुरारोग्यमैश्वर्यं तस्य पुण्यफलप्रदम्॥
अवतु माम् ॥ अवतु वक्तारम् ॥ अवतु श्रोतारम् ॥ अवतु दातारम् ॥ अवतु धातारम् ॥ अवानूचानमव शिष्यम् ॥ अव पश्चात्तात् ॥ अव पुरस्तात् ॥ अवोत्तरात्तात् ॥ अव दक्षिणात्तात् ॥ अव चोर्ध्वात्तात् ॥ अवाधरात्तात् ॥ सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥
ॐ विशाखाय नमः
ॐ शृतं मे मा प्रहासीः अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि ऋतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
ॐ प्राज्ञ्यै नमः
ॐ निटिलाक्षाय नमः