शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम शक्ति उद्घोष मंत्र
अग्रतश्चतुरो वेदान् पृष्ठतः सशरं धनुः। उभाभ्यां च समर्थोऽहं शापादपि शरादपि॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारशौर्य एवं तप-साधना श्लोक
स्वरूपशास्त्र-शस्त्र प्रवीण गुरु परशुराम
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मेरे आगे चारों वेद हैं (ब्रह्म-ज्ञान) और पीछे बाणों सहित धनुष है (क्षत्र-तेज)। मैं दोनों में ही पूर्ण समर्थ हूँ—शाप देने में भी और बाण चलाने में भी।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ज्ञान (शास्त्र) और पराक्रम (शस्त्र) का संतुलित विकास
02
विपरीत परिस्थितियों में आत्म-बल
विस्तृत लाभ
ज्ञान (शास्त्र) और पराक्रम (शस्त्र) का संतुलित विकास; विपरीत परिस्थितियों में आत्म-बल।
जप काल
शौर्य-साधना, वाद-विवाद या विद्यारंभ के समय।
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