शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
ॐ पृथिवीपतये नमः — अर्थ
जिन्होंने संपूर्ण पृथ्वी को जीतकर अश्वमेध यज्ञ में महर्षि कश्यप को दान कर दिया, उन पृथ्वी-पति को नमस्कार। (लाभ: संपत्ति एवं राज्याधिकार की प्राप्ति) 19।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
प्रतीच्यां उन्मत्त भैरवाय नमः प्रतीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ श्रीं ह्रीं ह्स्सौः हूँ फट् नील सरस्वत्यै स्वाहा।
ॐ गुं नमः ॥
अन्तर्बहिश्च तत्सर्वं व्याप्य नारायणः स्थितः
ॐ पुण्योदयाय नमः
ॐ ह्स्फ्रेँ ख्फ्रेँ ह्स्रौँ ह्स्ख्फ्रेँ ह्सौँ हनुमते नमः॥