महर्षि-वंदित परशुराम
महेन्द्रे वै गिरिश्रेष्ठे रामं नित्यम् उपासते। ऋषयो वेदविदुषो गन्धर्वाप्सरसस्तथा॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
पर्वतों में श्रेष्ठ महेंद्र पर्वत पर, वेदों के ज्ञाता ऋषिगण, गंधर्व और अप्सराएँ नित्य भगवान परशुराम की उपासना करते हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
वेदों के ज्ञान में रुचि और सत्संग की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
वेदों के ज्ञान में रुचि और सत्संग की प्राप्ति।
जप काल
प्रातःकालीन नित्य पूजा में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शम्भूदेशकाय नमः
ॐ कल्याणप्रकृतये नमः
ॐ सरस्वत्यै स्वाहेति श्रोत्रं पातु निरन्तरम्। (स्वरूप: सरस्वती | लाभ: कानों, श्रवण-शक्ति व नाद-ग्रहण की रक्षा | अर्थ: सरस्वती मेरे कानों की निरंतर रक्षा करें) 8
अक्षमालां कुठारं च रत्नपात्रं स्वदन्तकम् । धत्ते करैर्विघ्नराजो ढुण्ढिनाम मुदेऽस्तु नः ॥
ॐ इष्टभक्तिप्रदायिन्यै नमः
राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे । राधे श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे राधे ॥