ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

महर्षि-वंदित परशुराम

महेन्द्रे वै गिरिश्रेष्ठे रामं नित्यम् उपासते। ऋषयो वेदविदुषो गन्धर्वाप्सरसस्तथा॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारध्यान-स्तुति
स्वरूपतपस्वी भार्गव
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

पर्वतों में श्रेष्ठ महेंद्र पर्वत पर, वेदों के ज्ञाता ऋषिगण, गंधर्व और अप्सराएँ नित्य भगवान परशुराम की उपासना करते हैं।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

वेदों के ज्ञान में रुचि और सत्संग की प्राप्ति

विस्तृत लाभ

वेदों के ज्ञान में रुचि और सत्संग की प्राप्ति।

जप काल

प्रातःकालीन नित्य पूजा में।

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