ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

भार्गव कवच (प्रारंभ एवं शिव-पार्वती संवाद)

कैलासशिखरे रम्ये शंकरं लोकशंकरम्। पार्वत्युवाच- त्वत्तः श्रुतान्यशेषाणि जामदग्न्यस्य साम्प्रतम्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारकवच-मंत्र
स्वरूपसर्व-सिद्धिप्रदाता
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

रमणीय कैलाश शिखर पर लोकों का कल्याण करने वाले भगवान शंकर जी से पार्वती जी ने कहा: "हे नाथ! मैंने आपसे जमदग्नि-पुत्र (परशुराम) के सभी वृत्तांत सुने हैं।"

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

शिव-पार्वती संवाद के स्मरण से कवच की आधिभौतिक सिद्धि

विस्तृत लाभ

शिव-पार्वती संवाद के स्मरण से कवच की आधिभौतिक सिद्धि।

जप काल

कवच पाठ के आरंभ में विनियोग के रूप में।

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