शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री परशुराम ध्यान मंत्र
ध्यायेच्च तामस क्षत्र रुधिर रक्त परश्वधम्। रक्त नेत्रं करस्थं ब्रह्म सूत्रं यम प्रभम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारध्यान मंत्र
स्वरूपरौद्र, संहारक एवं यम-प्रभ परशुराम
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मैं उनका ध्यान करता हूँ जिनका फरसा तामसी (पापी) क्षत्रियों के रक्त से लाल है, जिनके नेत्र क्रोध से रक्तिम हैं, जो कर में ब्रह्मसूत्र (जनेऊ) धारण करते हैं और जिनकी आभा प्रलयंकारी यमराज के समान भयंकर है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
साधना से पूर्व एकाग्रता की स्थापना एवं साधक के भीतर छिपे आंतरिक शत्रुओं (काम, क्रोध, मद) का शमन
विस्तृत लाभ
साधना से पूर्व एकाग्रता की स्थापना एवं साधक के भीतर छिपे आंतरिक शत्रुओं (काम, क्रोध, मद) का शमन।
जप काल
मूल मंत्र के जप से पूर्व मानसिक ध्यान स्थापित करने हेतु।
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