श्री परशुराम ध्यान मंत्र
ध्यायेच्च तामस क्षत्र रुधिर रक्त परश्वधम्। रक्त नेत्रं करस्थं ब्रह्म सूत्रं यम प्रभम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
मैं उनका ध्यान करता हूँ जिनका फरसा तामसी (पापी) क्षत्रियों के रक्त से लाल है, जिनके नेत्र क्रोध से रक्तिम हैं, जो कर में ब्रह्मसूत्र (जनेऊ) धारण करते हैं और जिनकी आभा प्रलयंकारी यमराज के समान भयंकर है।
इस मंत्र से क्या होगा?
साधना से पूर्व एकाग्रता की स्थापना एवं साधक के भीतर छिपे आंतरिक शत्रुओं (काम, क्रोध, मद) का शमन
विस्तृत लाभ
साधना से पूर्व एकाग्रता की स्थापना एवं साधक के भीतर छिपे आंतरिक शत्रुओं (काम, क्रोध, मद) का शमन।
जप काल
मूल मंत्र के जप से पूर्व मानसिक ध्यान स्थापित करने हेतु।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कारणोपात्तदेहाय नमः
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
ॐ योगानन्दाय नमः
ॐ रुद्रावीर्यसमुद्भवाय नमः
क्लीं कृष्णाय राधिकायै श्रेयं नमः
ॐ पद्मनाभाय नमः