चिरंजीवी परशुराम स्तुति
आस्तेऽद्यापि महेन्द्राद्रौ न्यस्तदण्डः प्रशान्तधीः। उपगीयमानचरितः सिद्धगन्धर्वचारणैः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
भगवान परशुराम आज भी दंड (शस्त्र) त्यागकर, अत्यंत शांत बुद्धि वाले होकर महेंद्र पर्वत पर निवास करते हैं। सिद्ध, गंधर्व और चारण निरंतर उनके पवित्र चरित्र का गान करते हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
दीर्घायु, मानसिक शांति और आध्यात्मिक सिद्धि की सहज प्राप्ति
विस्तृत लाभ
दीर्घायु, मानसिक शांति और आध्यात्मिक सिद्धि की सहज प्राप्ति।
जप काल
सायं काल, भगवान विष्णु के स्मरण के साथ शांत चित्त से।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
बिभ्राणः शुक बीजपूर कमलं माणिक्यकुम्भं अङ्कुशं पाशं कल्पलतां च खड्ग विलसत् ज्योतिः सुधानिर्झरः । श्यामेनात्त सरोरुहेण सहितो देवीद्वयेनान्तिके गौराङ्गो वरदान हस्त कमलो लक्ष्मीगणेशोऽवतात् ॥
ॐ वाग्मिने नमः
ॐ अधोक्षजाय नमः
ॐ त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमः ॐ भुवनेश्वर्यै नमः।
अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसन्ततिं दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्।
ॐ विश्वशक्त्यै नमः