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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

चिरंजीवी परशुराम स्तुति

आस्तेऽद्यापि महेन्द्राद्रौ न्यस्तदण्डः प्रशान्तधीः। उपगीयमानचरितः सिद्धगन्धर्वचारणैः॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारअवतार मंत्र / स्तुति श्लोक
स्वरूपमहेंद्रगिरि-वासी, तपस्वी एवं चिरंजीवी परशुराम
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

भगवान परशुराम आज भी दंड (शस्त्र) त्यागकर, अत्यंत शांत बुद्धि वाले होकर महेंद्र पर्वत पर निवास करते हैं। सिद्ध, गंधर्व और चारण निरंतर उनके पवित्र चरित्र का गान करते हैं।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

दीर्घायु, मानसिक शांति और आध्यात्मिक सिद्धि की सहज प्राप्ति

विस्तृत लाभ

दीर्घायु, मानसिक शांति और आध्यात्मिक सिद्धि की सहज प्राप्ति।

जप काल

सायं काल, भगवान विष्णु के स्मरण के साथ शांत चित्त से।

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