शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम अष्टकम् (श्लोक 1)
कराभ्यां परशुं चापं दधानं रेणुकात्मजं। जामदग्न्यं भजे रामं भार्गवं क्षत्रियान्तकं॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपरेणुकानंदन, क्षत्रियांतक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अपने हाथों में परशु (फरसा) और चाप (धनुष) धारण करते हैं, उन रेणुका-पुत्र, जमदग्निनंदन, भृगुवंशी, क्षत्रियों के विनाशक भगवान राम (परशुराम) को मैं भजता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सभी प्रकार के भयों, विशेषकर राज-भय और मुकदमों से मुक्ति
विस्तृत लाभ
सभी प्रकार के भयों, विशेषकर राज-भय और मुकदमों से मुक्ति।
जप काल
नित्य पूजा के समय भगवान के चित्र के सम्मुख।
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