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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

परशुराम अष्टकम् (श्लोक 4)

वशीकृतमहादेवं दृप्तभूपकुलान्तकम्। तेजस्विनं कार्तवीर्यनाशनं भवनाशनम्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपशिव-शिष्य, कार्तवीर्य-नाशक
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जिन्होंने अपनी अनन्य भक्ति से साक्षात् महादेव को वश में कर लिया, जो अंहकारी राजाओं के कुल का अंत करने वाले हैं, उन अत्यंत तेजस्वी, कार्तवीर्य अर्जुन के नाशक और जन्म-मरण के चक्र (भव) को नष्ट करने वाले परशुराम को नमन।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अत्यंत अंहकारी और शक्तिशाली शत्रुओं का नाश और भगवान शिव की कृपा की प्राप्ति

विस्तृत लाभ

अत्यंत अंहकारी और शक्तिशाली शत्रुओं का नाश और भगवान शिव की कृपा की प्राप्ति।

जप काल

घोर शत्रु-बाधा निवारण हेतु।

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