शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मूल/बीज मंत्र
ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतांत्रिक मूल/बीज मंत्र
स्वरूपफरसा-धारी राम (क्षत्रियांतक स्वरूप)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
'ॐ' और अग्नि-बीज 'रां' से युक्त, जिनके हाथों में परशु (फरसा) सुशोभित है, उन भगवान परशुराम को मेरा नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
उच्च बौद्धिक क्षमता का विकास, शत्रुओं पर अजेय विजय, वाक्-विकारों (वाणी दोष) का शमन और अटूट साहस की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
उच्च बौद्धिक क्षमता का विकास, शत्रुओं पर अजेय विजय, वाक्-विकारों (वाणी दोष) का शमन और अटूट साहस की प्राप्ति।
जप काल
प्रातःकाल, स्नानोपरांत 45 दिनों तक नित्य 108 बार जप। रुद्राक्ष की माला उत्तम है।
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