शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ परमार्थैकनिरताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपपरमार्थ-लीन
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो केवल परमार्थ (जीव-कल्याण) के कार्य में निरंतर लगे रहते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
परोपकार
विस्तृत लाभ
परोपकार
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ बलसिद्धिकराय नमः
ॐ विश्वरूपप्रदर्शकाय नमः
ॐ रत्नगर्भायै नमः
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
ॐ तार्क्ष्यवाहनाय नमः
ॐ ह्रां सर्वशक्तिधाम्ने ईशानात्मने अङ्गुष्ठाभ्यां नमः