शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ कान्ताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपकमनीय रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो देखने में अत्यंत कमनीय और मोहक हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आकर्षण
विस्तृत लाभ
आकर्षण
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः
ॐ वृषाङ्काय नमः
राजमातां राजलक्ष्मीं राजेष्टफलदायिनीम्। प्रत्यङ्गिरां नमस्यामि सिद्धिलक्ष्मीजयप्रदां॥
ॐ कालिकायै नमः
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
ॐ लङ्कापुरविदाहकाय नमः