शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ तत्त्वरूपिणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपपरमतत्त्व
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो स्वयं परमतत्त्व और अंतिम सत्य के साक्षात् रूप हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आत्मज्ञान
विस्तृत लाभ
आत्मज्ञान
जप काल
ध्यान काल
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वाराह्यै नमः
तब जनक पाइ बसिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै। मांडवी श्रुतकीरति उरमिला कुँअरि लईं हँकारि कै॥
घोर रूपे महारावे सर्वशत्रु भयङ्करि। भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥
ॐ देवकीनन्दनाय नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम्। जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥