शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ अतीन्द्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपश्रेष्ठ
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका बल और ऐश्वर्य देवराज इन्द्र से भी बहुत अधिक है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ऐश्वर्य
विस्तृत लाभ
ऐश्वर्य
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
खों खं खं फट् प्राण-ग्रासी प्राण-ग्रासी हुं फट् सर्वशत्रुसंहारणां शरभशालुवाय पक्षिराजाय हुं फट् स्वाहा।
ॐ यश्छन्दसामृषभो विश्वरूपः। छन्दोभ्योऽध्यमृतात्सम्बभूव। स मेन्द्रो मेधया स्पृणोतु। अमृतस्य देव धारणो भूयासम्॥
पाशाङ्कुशापूप कुठारदन्तं चञ्चत्करकॢप्त वराङ्गुलीयकम् । पीतप्रभं कल्पतरोरधस्थं भजामि नृत्तोपपदं गणेशम् ॥
ॐ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।
ॐ वशीकराय नमः
ॐ कंसारये नमः