माँ काली मंत्र
ॐ कोमलाङ्ग्यै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
अत्यंत सुकोमल और नाजुक अंगों वाली देवी।
इस मंत्र से क्या होगा?
कठोरता का त्याग और संवेदनशीलता की वृद्धि
विस्तृत लाभ
कठोरता का त्याग और संवेदनशीलता की वृद्धि।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अनन्तशक्तये नमः
ॐ ह्रीं श्री राधायै स्वाहा
ॐ नमस्ते रुद्र मन्यव उतोत इषवे नमः। नमस्ते अस्तु धन्वने बाहुभ्यामुत ते नमः॥
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
ॐ भिन्नार्गलाय नमः
ॐ सहस्रार ज्वालावर्तिने क्ष्रौम् हन हन हुं फट् स्वाहा