परशुराम अष्टकम् (श्लोक 2)
नमामि भार्गवं रामं रेणुकाचित्तनन्दनं। मोचिताम्बार्तिमुत्पातनाशनं क्षत्रनाशनम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
मैं भृगुवंशी राम को नमन करता हूँ जो माता रेणुका के चित्त (हृदय) को आनंदित करने वाले हैं, जिन्होंने अपनी माता के सभी कष्टों को दूर किया, जो जीवन के उत्पातों और दुष्ट क्षत्रियों के नाशक हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
माता के प्रति अगाध भक्ति की उत्पत्ति एवं पारिवारिक क्लेशों का नाश
विस्तृत लाभ
माता के प्रति अगाध भक्ति की उत्पत्ति एवं पारिवारिक क्लेशों का नाश।
जप काल
प्रातःकाल उठते ही।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ क्लैब्यनाशिन्यै नमः
कामदेवाय सर्वजनप्रियाय सर्वजनसम्मोहनाय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल सर्वजनस्य हृदयं मे वशं कुरु कुरु स्वाहा ॥
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये त्रिलोकात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ जटाधराय नमः
ॐ अप्रमेयाय नमः