दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः (अगस्त्य रचित)
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना। हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण॥ भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना। सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो चार भुजाओं से युक्त हैं, स्फटिक की माला, श्वेत कमल, तोता और पुस्तक धारण करती हैं, वे सुप्रसन्न वाग्देवता मेरे मुख में सदा निवास करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
वदन (मुख) पर सदा वाग्देवी की प्रसन्नता का वास
विस्तृत लाभ
वदन (मुख) पर सदा वाग्देवी की प्रसन्नता का वास।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ खण्डपरशवे नमः
नमो भगवते उग्र भैरवाय सर्वविघ्ननाशाय ठः ठः स्वाहा।
ॐ कपालदुर्गकारिण्यै नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये ब्रह्मानन्दामृतं तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
इतीदमद्भुतस्तवं निशम्य भानुनन्दिनी करोतु सन्ततं जनं कृपाकटाक्षभाजनम्। भवेत्तदैव सञ्चितत्रिरूपकर्मनाशनं लभेत्तदा व्रजेन्द्रसूनुमण्डलप्रवेशनम्॥
ॐ चक्रपाणये नमः