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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

सरस्वती महाभागे

सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने। विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तु ते॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारप्रार्थना मन्त्र
स्वरूपविशालाक्षी, विद्यारूपा
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे महाभाग्यशालिनी, कमल नयनों वाली, विद्या स्वरूपा, विशाल नेत्रों वाली सरस्वती! मुझे विद्या प्रदान करें, आपको नमस्कार है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

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108 बार जपने से रचनात्मक क्षमता और मेधा में वृद्धि

विस्तृत लाभ

108 बार जपने से रचनात्मक क्षमता और मेधा में वृद्धि।

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