उत स्या नः सरस्वती
उत स्या नः सरस्वती घोरा हिरण्यवर्तनिः। वृत्रघ्नी वष्टि सुष्टुतिम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
स्वर्ण रूपी मार्ग वाली, शत्रुओं (वृत्र) का नाश करने वाली, उग्र स्वरूप वाली वह सरस्वती हमारी सुंदर स्तुति की कामना करती हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
विद्या प्राप्ति में आने वाली भयंकर बाधाओं का नाश, एकाग्रता की रक्षा
विस्तृत लाभ
विद्या प्राप्ति में आने वाली भयंकर बाधाओं का नाश, एकाग्रता की रक्षा।
जप काल
ज्ञान के मार्ग में अवरोध आने पर मानसिक जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ पूतात्मने नमः
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
ॐ सुखनिधये नमः
ॐ सत्यवाचे नमः
ॐ नमो भगवते नरसिंहाय नमस्तेजस्तेजसे आविराविर्भव वज्रनख वज्रदंष्ट्र कर्माशयान् रन्धय रन्धय तमो ग्रस ग्रस ॐ स्वाहा। अभयमभयमात्मनि भूयिष्ठा ॐ क्ष्रौम्॥
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥