शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
उत स्या नः सरस्वती
उत स्या नः सरस्वती घोरा हिरण्यवर्तनिः। वृत्रघ्नी वष्टि सुष्टुतिम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक मन्त्र (शत्रु-बाधा नाशक)
स्वरूपवृत्रघ्नी (अज्ञान और बाधाओं का नाश करने वाली उग्र स्वरूपा)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
स्वर्ण रूपी मार्ग वाली, शत्रुओं (वृत्र) का नाश करने वाली, उग्र स्वरूप वाली वह सरस्वती हमारी सुंदर स्तुति की कामना करती हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विद्या प्राप्ति में आने वाली भयंकर बाधाओं का नाश, एकाग्रता की रक्षा
विस्तृत लाभ
विद्या प्राप्ति में आने वाली भयंकर बाधाओं का नाश, एकाग्रता की रक्षा।
जप काल
ज्ञान के मार्ग में अवरोध आने पर मानसिक जप।
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