शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
ॐ यश्छन्दसामृषभो (मेधा सूक्त)
ॐ यश्छन्दसामृषभो विश्वरूपः। छन्दोभ्योऽध्यमृतात्सम्बभूव। स मेन्द्रो मेधया स्पृणोतु। अमृतस्य देव धारणो भूयासम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारमेधा मन्त्र / मेधा सूक्त
स्वरूपमेधा देवी (सरस्वती), परब्रह्म-स्वरूपिणी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो ओंकार सभी वेदों में श्रेष्ठ और विश्वरूप है, जो वेदों के अमृत तत्व से प्रकट हुआ है, वह परमात्मा मुझे मेधा (बुद्धि) से युक्त करे। हे देव! मैं अमृतमय ज्ञान को धारण करने वाला बनूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
धारण शक्ति (Retention/Memory) में अभूतपूर्व वृद्धि, मेधा और प्रज्ञा की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
धारण शक्ति (Retention/Memory) में अभूतपूर्व वृद्धि, मेधा और प्रज्ञा की प्राप्ति।
जप काल
उपनयन संस्कार, प्रात:काल, विद्या-साधना में।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र