शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ वृष्ट्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवृष्टि
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वर्षा
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ज्ञान की अनवरत वर्षा
विस्तृत लाभ
ज्ञान की अनवरत वर्षा
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ प्राज्ञाय नमः
ॐ शाश्वताय नमः
ॐ भीमसेनसहायकृते नमः
देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥ 18
वशीकृतमहादेवं दृप्तभूपकुलान्तकम्। तेजस्विनं कार्तवीर्यनाशनं भवनाशनम्॥
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥