शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ विभावर्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविभावरी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रात्रि
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अज्ञान की रात्रि में प्रकाशक बनना
विस्तृत लाभ
अज्ञान की रात्रि में प्रकाशक बनना
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
भद्रकाली महाकाली किलिकिले फट् स्वाहा
ॐ नमो भगवते नरसिंहाय नमस्तेजस्तेजसे आविराविर्भव वज्रनख वज्रदंष्ट्र कर्माशयान् रन्धय रन्धय तमो ग्रस ग्रस ॐ स्वाहा। अभयमभयमात्मनि भूयिष्ठा ॐ क्ष्रौम्॥
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं काल भैरवाय नमः।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा॥
ॐ शान्ताय नमः