ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

ब्रह्मपत्नी गायत्री

ॐ वाग्देव्यै च विद्महे ब्रह्मपत्न्यै च धीमहि। तन्नो वाणी प्रचोदयात्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवाग्देवी गायत्री
स्वरूपवाणी / ब्रह्मपत्नी
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हम वाग्देवी को जानते हैं, ब्रह्मा की शक्ति (पत्नी) का ध्यान करते हैं। वे वाणी स्वरूपा हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अभिव्यक्ति (Expression) की स्पष्टता और वाक् चातुर्य

विस्तृत लाभ

अभिव्यक्ति (Expression) की स्पष्टता और वाक् चातुर्य।

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