शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
पृष्ठ रक्षा मन्त्र
ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ हुं ह्रां रां ज्वाल कराल्यै क्रोधश्च काल भैरवाय नमः।
वेताल शक्ति शर कार्मुक चक्र खट्वाङ्ग मुद्गर गदाम् अङ्कुश नागपाशान् । शूलं च कुन्तं परशुं ध्वजमुद्वहन्तं वीरं गणेशमरुणं सततं स्मरामि ॥
ॐ सुब्रह्मण्याय नमः
ॐ करप्रियायै नमः
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय ऊर्ध्व मुखे। हयग्रीवाय सकल जन वशीकरणाय स्वाहा॥
ॐ कान्ताय नमः