शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
विष्णवे जिष्णवे महाविष्णवे प्रविष्णवे महेश्वराय
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र पूर्व-पीठिका मंत्र
स्वरूपविजयी पुरुषोत्तम
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मैं उन विजयी, सर्वव्यापी, महेश्वर और दैत्यों का अंत करने वाले पुरुषोत्तम विष्णु को नमन करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विरोधियों पर अंतिम विजय और सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का ध्वंस
विस्तृत लाभ
विरोधियों पर अंतिम विजय और सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का ध्वंस 3।
जप काल
श्री विष्णु सहस्रनाम के अनुष्ठान से पूर्व।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ त्रैलोक्यवासिन्यै नमः
नीलकण्ठोऽवतु ग्रीवां पिनाकपाणिर्बाहुकौ
ॐ कृष्णप्राणाधिकायै राधायै नमः
ॐ वीरवराग्रगाय नमः
कामदेवाय सर्वजनप्रियाय सर्वजनसम्मोहनाय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल सर्वजनस्य हृदयं मे वशं कुरु कुरु स्वाहा ॥
जो माता एकवीरा (रेणुका का एक नाम) के पुत्र हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: माता की असीम कृपा) 19।