शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ कृष्णसेवापरायणायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सदा कृष्ण की सेवा में तत्पर रहती हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दास्य और सेवा भाव का उदय
विस्तृत लाभ
दास्य और सेवा भाव का उदय।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा ओम हनुमत वेदर वेग वेग आओ अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ भेड़ी तोड़ो ताला तोड़ो बंधन धन तोड़ो मोडा अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ मेरी भक्ति गुरु की शक्ति। पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा।
ॐ भूतभव्यभवत्प्रभवे नमः
कृष्णाय वासुदेवाय देवकीनन्दनाय च । नन्दगोपकुमाराय गोविन्दाय नमो नमः ॥
ॐ ह्रीं राधिकायै नमः / ॐ राधायै स्वाहा।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः
ॐ महागणपतये नमः