शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
वेल् मुरुगन जयघोष
वेल् वेल् वेत्रिवेल् मुरुगनुक्कु अरोहरा
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारविजय मंत्र
स्वरूपवेलायुधधारी मुरुगन
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
विजय दिलाने वाले भाले (वेल्) को धारण करने वाले भगवान मुरुगन की जय हो।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संघर्षों में अदम्य साहस और अंतिम विजय
विस्तृत लाभ
संघर्षों में अदम्य साहस और अंतिम विजय।
जप काल
यात्रा से पूर्व या ताईपूसम पर सामूहिक उद्घोष।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ महर्षये नमः
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि॥
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
ॐ सुरराज्यप्रदः पातु पादौ मे नृहरीश्वरः
ॐ कृष्णप्रेमवतीकर्त्र्यै नमः
ॐ मृतवानरजीवनाय नमः