शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ श्रीमती नेत्रयुगलं पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपश्रीमती
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
श्रीमती मेरे दोनों नेत्रों की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: दोनों नेत्रों की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: दोनों नेत्रों की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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ॐ अभिवाद्याय नमः
ॐ यं रः अनादिशक्तिधाम्ने सर्वात्मने करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये चराचरात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
शङ्खेषु चाप कुसुमेषु कुठार पाश चक्राङ्कुशौ कलममञ्जरिका गदाद्यौ । पाणिस्थितैः परिसमाहित भूषणः श्री विघ्नेश्वरो विजयते तपनीयगौरः ॥
ॐ जगद्भर्त्रे नमः
ॐ भूतभावनाय नमः