श्री राधा मंत्र
राकायां च सिताष्टम्यां दशम्यां च विशुद्धधीः। एकादश्यां त्रयोदश्यां यः पठेत्साधकः सुधीः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो विशुद्ध बुद्धि वाला साधक पूर्णिमा, शुक्लाष्टमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी को इसका पाठ करता है...
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: साधना के नियमों की सिद्धि
विस्तृत लाभ
लाभ: साधना के नियमों की सिद्धि।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः। दिवीव चक्षुराततम्॥
ॐ कंससेवकमोहनाय नमः
ॐ जामदग्नाय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुरामः प्रचोदयात्
ॐ अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चराम्यहमादित्यैरुत विश्वदेवैः। अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमिन्द्राग्नी अहमश्विनोभा॥
ॐ विराधवधपण्डिताय नमः
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा॥