श्री राधा मंत्र
राकायां च सिताष्टम्यां दशम्यां च विशुद्धधीः। एकादश्यां त्रयोदश्यां यः पठेत्साधकः सुधीः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो विशुद्ध बुद्धि वाला साधक पूर्णिमा, शुक्लाष्टमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी को इसका पाठ करता है...
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: साधना के नियमों की सिद्धि
विस्तृत लाभ
लाभ: साधना के नियमों की सिद्धि।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये द्वादशादित्याः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
जाज्वल्यमानं सुरवृन्दवन्द्यं कुमारधारातटमन्दिरस्थम् । कन्दर्परूपं कमनीयगात्रं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
ॐ श्मशानवासिने नमः।
ॐ ह्रीं गुरुरूपे मां गृह्ण ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा
ॐ कलिकल्मषनाशिन्यै नमः