शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
अशेषहावभावधीरहीरहारभूषिते प्रभूतशातकुम्भकुम्भकुम्भकुम्भसुस्तनि। प्रशस्तमन्दहास्यचूर्णपूर्णसौख्यसागरे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकृपा-कटाक्ष/स्तोत्र मंत्र।
स्वरूपसौख्य-सागरे (सुख का सागर)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अनगिनत हाव-भावों और हीरों के हार से सुसज्जित, मंद हास्य से पूर्ण सुख के सागर रूपी राधे, कृपा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
लाभ: पूर्ण सुख की अनुभूति
विस्तृत लाभ
लाभ: पूर्ण सुख की अनुभूति।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
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