कार्तिकेय मंत्र
ॐ कलनादनिनादिन्यै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
चक्रवाक पक्षी के समान मधुर एवं रहस्यमयी नाद करने वाली।
इस मंत्र से क्या होगा?
सूक्ष्म ध्वनियों (नाद-ब्रह्म) को सुनने की क्षमता का विकास
विस्तृत लाभ
सूक्ष्म ध्वनियों (नाद-ब्रह्म) को सुनने की क्षमता का विकास।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ परमपुरुषाय नमः
भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥ 16
ॐ गुणाकराय नमः
ॐ परयन्त्रप्रभेदकाय नमः