शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ कृपाध्यक्षायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो ईश्वर की कृपा-वितरण की अध्यक्षा हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
बिना योग्यता के भी भगवान की कृपा मिलना
विस्तृत लाभ
बिना योग्यता के भी भगवान की कृपा मिलना।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
ॐ नामपारायणप्रियाय नमः
ॐ अनादये नमः
ॐ भैरवेशाय नमः।
भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥
ॐ कमनीयायै नमः