शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ लोकपूज्याय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपजग-वंदनीय
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल सहित संपूर्ण लोकों द्वारा पूजे जाने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
जपतां कवचं नित्यं सर्वसौभाग्यपूरितम्। इति श्रीविष्णुयामले उपरिभागे जामदग्न्यदिव्याञ्जनसिद्धिकल्पे श्रीभार्गवकवचं सम्पूर्णम्॥
ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्म-मन्त्र-यन्त्र-तन्त्र-औषधास्त्र-शस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय...
ॐ विभीषणपरित्रात्रे नमः
ॐ श्रितवत्सलाय नमः
ॐ पिशिताशप्रभञ्जनाय नमः
ॐ भ्रूयुगं शशिशोभना पातु।