शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि प्रसन्नवक्त्रपङ्कजे निकुञ्जभूविलासिनि। व्रजेन्द्रभानुनन्दिनि व्रजेन्द्रसूनुसङ्गते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥ मुनीन्द्र-वन्दिते (ऋषियों द्वारा वंदित)
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकृपा-कटाक्ष/स्तोत्र मंत्र।
स्वरूपलाभ: शोकों का नाश।
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे मुनीन्द्रों द्वारा वंदित, त्रिलोकी का शोक हरने वाली, और निकुंज में विलास करने वाली, आप मुझ पर कृपा-कटाक्ष कब करेंगी?
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विधि: नित्य पाठ
विस्तृत लाभ
विधि: नित्य पाठ।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
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